इंदौर के संदर्भ केंद्र, रुपांकन, सदभावना प्रतिष्ठा व भोपाल की पीपुल्स रिसर्च सोसायटी और अनहद दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में सूफी गायन की संगीत संध्या का आयोजन किया गया | इसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त युवा सूफी संगीतकार ध्रुव संगारी व अमजद खान ने प्रस्तुति दी |
इस अवसर पर विनीत तिवारी ने कहा कि इस कार्यक्रम के पीछे मकसद सिर्फ संगीत सुनना ही नही बल्कि सूफी संतों की वाणी के जरिये अमन के खिलाफ काम कर रही ताकतों को यह बताना है कि मौजूदा माहौल में भी अनेक हैं जो उनकी बांटने वाली साजिशों के शिकार नही हुए हैं |
सूफी गायक ध्रुव ने राग बसंत पर पहले छोटा ख्याल में फूल रही सरसों जैसे रोमानी बोलो वाले कलाम को पेश किया इसके बाद हजरत बूअलीशा कलंदर का कलाम नमी दनाम कूजा रफतम को पेश किया |
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